Dumb-Heart's Voice

kuch Baaten jo Dil me ankahi reh gyi

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Upper Berth


(google images)

Train Journey

Train के upper berth पे, कंबल की आड़ से
झाँकती वो आँखें, आज भी याद है.
काली कजरारी, मासूमियत से भरी
पूरे compartment को घूर रही थी.

B14 पे मैं, तो B11 मे २२ वर्षीय अमाया”
रात भर सोचा पर कुछ कह ना पाया .

वो तो भला हो need for technology का
वरना शायद ही कुछ बात होती
“आपका हो गया तो मैं charge कर लूँ”
के बहाने कुछ जान पहचान तो हुई

दिन तो बातों में निकल गया पर रात को दुआ की
ट्रेन खराब हो जाए, या कोई hi-jack ही कर ले !

रात भर उसकी आँखों को देखता रहा
उसकी महेंदी के गहरे रंग निहारता रहा
और उसकी हर करवट पे
Bracelet के घुंघरूओं की आवाज़ सुनता रहा.

वक़्त अब ख़तम हो चला station आ रहा था
हिम्म्त जुटा कर कम से कम number तो माँग लिया

आज दो साल बीत गये
जब घरवाले रिश्ते की बात करते हैं
मैं चुपके से एक number dial करके काट देता हूँ
और धीरे से अपने call list मे “अमाया” पढ़ता हूँ!

वो आँखें, आज भी याद है
अब भी ताज़ा है वो सफ़र दिल्ली से बंगलूरु का !!

Koi Aanshu toh Ponchhe..


दिल जब टूटता है तो

दर्द बहुत होता है

दर्द जब होता है तो

दिल किसी हमदर्द को ढूंढ़ ता  है

 

पर जब अपना दर्द हमदर्द का दर्द बन जाए

तो क्या  होता है ?

दिल अपने ज़ख्म भुला कर उसके घाव को भरता है

अपने टुकड़े समेट कर ये

उसके आंसुओं को पूंछता  है

 

दिल ने जीना सिख लिया

टुकड़ों में टांका मार लिया

दुसरो दूसरों की ख़ुशी में

खुद मुस्कुराना सिख लिया

 

पर दिल बेचारा दुखता तो है

उसका गम  उसे कचोटता तो है

आँखें नम होती तो है

तन्हाई में रोती  तो है

अब भी किसी ऐसे हमदर्द को चाहती तो है

जो दर्द पे आंसू न बहाए , बातें न बनाये

पर जो आंसू को पोंछे  और दिल को बहलाए .

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