Dumb-Heart's Voice

kuch Baaten jo Dil me ankahi reh gyi

Archive for the category “Uncategorized”


Suraj ko to sab salaam karte hai par sukoon taaron me Hi milta h

 

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आईना कहाँ है मेरा?


एहसान नही भूलूंगी तेरा,
तेरी खिड़की पे
तूने मुझे घोंसला बनाकर दिया |
 
जब अंडा टूटा,
मैं बाहर निकली
तूने मुझे दुनिया से बचाया
तूने मेरे उड़ान सीखने तक
मुझे खिलाया, पानी पिलाया,
ये एहसान नही भूलूंगी तेरा|

पर,

जब उड़ान सीखी ही थी मैने,
तूने पकड़ कर पिंजड़े मे रख दिया?
पर जो अभी निकले ही थे,
तारों से टकरा कर टूटने भी लगे!
कभी तेरे घर के बाहर दुनिया देखी ही नही
सोचा मैने शायद,
यही दुनिया है मेरी,
मुझ जैसी चिड़िया पिंजरे के लिए ही बनी है|

एक दिन तेरे आँगन से
कुछ मुझ जैसों को ही उड़ते देखा,
आसमान में बादलों को छूते देखा
कभी खाना कभी पानी के लिए
डाल डाल भटकते देखा|

तो खुदसे ही ये सवाल किया,
-कौन हूँ मैं?
-पहचान क्या है मेरी?
-आईना कहाँ है मेरा..
–काँच या बहती नदियाँ?

एहसान नही भूलूंगी तेरा
पर आज पिंजरा खुला है तो
तो ये उड़ने का मौका भी नही छोड़ूँगी
पर वादा है,
तेरे आँगन मे आके रोज़ सुबह चहचाहाउंगी
एहसान नही भूलूंगी तेरा||

For Zindagi


एक उलझी सी पहेली है
ये ज़िंदगी है, जो साथ मेरे चली है|
गम हो या खुशी, फिर भी ये रही है,
धूप और छाओं की ये सहेली है|

बेइंतेहा नफरत भी इसी से हुई है,
बस फिर भी, ये ज़िंदगी ही तो अपनी है !
ऐसी अपनी सहेली से प्यार क्यूँ ना करूँ,
थोड़ी मस्ती और खुशी, इसकी भी तो बनती है | 🙂

Vasudhaiva Kutumbakam


The world as one family

The world as one family

 

 

 

 

 

Kyu duniya ko sarhadon me baant diya?

sabne apna alag dharm bana Liya!!

Kyu kisi ko hindu

kisiko Isaai or Muslim bta diya

kyu na sabko bas Insaan rhne diya??

 

Sabki dharti ek h

Sar ki Chhatri ek h

Suraj or chaand ek h

Swashon ki  hawa ek  h

 

Fir kyu-??

 

Mandir masjid bhinn h

Kyu gurudwara or girijaghar h?

Kyu nhi sabke liye ek hi dwaar h?

Kyu ye bhed bhao h!!

Ek ko pyaar toh

dusre ko dete ghao h!!

 

“Udaarachritaam” ka bhaav kahan gya

“Kyu manushya laghuchetasam” ho gya

Vasudhev Kutumbakam kahan kho gya.

 

Kyu dharm k naam pe ladna galat h

Kyu bhasha k naam pe vibhajan galat h ??

jab Desh k naam pe ladna bhakti h!!

Kya desh k liye dusron ka maarna

“ayam nijah paro veti” nhi h ?!!!

 

ye Vasudhaiva Kutumbakam aakhir kahan kho gya

Kyu na sabko bas insaan rhne diya!!!!

😦

 

PS: I understand this concept as a whole may not be easy to practice, but there can be an effort to see each other as humans rather than seeing as-

Rich poor, Christian/hindu/muslim/sikh/ , Indian/American/Australian/African, etc., and fighting with each other based on such stupid notion.


नादान से इस दिल कि दास्तान कुछ ऐसी है
बातों को छुपने कि जाने आदत ये कैसी है |

ना कुछ बताता है,
ना छुपा कुछ पाता है,
बेचारे इस दिल कि बात-
कभी आँखे बयान कर देती है
तो कभी कलम कुछ लिख देती है |

———–


Dumb-Heart's Voice

Kyu teri Zindagi kisi or ki jaagir h
kehne ko tu azaad h
par teri zindagi dusro k khatir h

kyu tu amaanat h
kyu tu zimmedari h
kyu tu chinta ka karan h
or tera jana, chinta ka sbse bada nivaran h

kyu tumhe sambhale rkhna h-
kyuki tumhe kahi or jana h,
kyuki tu toh parayi h,
tujhe kisi or k paas bhejna h?

tu akeli ho toh fikar h
tu kisi or k sath ho toh parwah h
tu ghar me rhe to gawar h
tu bahar ghume toh awaara h

kyu tu aisi h
kyu nhi oron k jaisi h
kyu nhi jeeti apni zindagi
kiske liye sambhale rakhi h


mai abhi ek beti hu
fir kabi bahu or patni hu
meri zindagi abi ma-baap ki zimmedari h
kyuki isme mere pati ki hissedaari  h

maa-baap ka karz h
unhe kaise dukh du
sasural mera…

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Koi Aanshu toh Ponchhe..


दिल जब टूटता है तो

दर्द बहुत होता है

दर्द जब होता है तो

दिल किसी हमदर्द को ढूंढ़ ता  है

 

पर जब अपना दर्द हमदर्द का दर्द बन जाए

तो क्या  होता है ?

दिल अपने ज़ख्म भुला कर उसके घाव को भरता है

अपने टुकड़े समेट कर ये

उसके आंसुओं को पूंछता  है

 

दिल ने जीना सिख लिया

टुकड़ों में टांका मार लिया

दुसरो दूसरों की ख़ुशी में

खुद मुस्कुराना सिख लिया

 

पर दिल बेचारा दुखता तो है

उसका गम  उसे कचोटता तो है

आँखें नम होती तो है

तन्हाई में रोती  तो है

अब भी किसी ऐसे हमदर्द को चाहती तो है

जो दर्द पे आंसू न बहाए , बातें न बनाये

पर जो आंसू को पोंछे  और दिल को बहलाए .

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